चाँद की आकृति क्यों बदलती है?

चाँद की आकृति क्यों बदलती है?

क्या तुमने कभी ध्यान दिया है कि चाँद हर रात अलग दिखता है? कभी वो एक बड़ा, चमकदार, गोल थाल जैसा होता है। कभी एक पतला केले जैसा टुकड़ा। और कभी-कभी तो वो दिखता ही नहीं! लगता है जैसे चाँद आँख-मिचौली खेल रहा है। लेकिन असली बात यह है कि चाँद की आकृति कभी बदलती ही नहीं। वो हमेशा एक गोल गेंद की तरह है, बिल्कुल पृथ्वी जैसा। बस हमें उसका अलग-अलग हिस्सा दिखता है। और इसके पीछे की वजह बहुत मज़ेदार है।

चाँद की अपनी कोई रोशनी नहीं होती। जो चमक हम देखते हैं वो दरअसल सूरज की रोशनी है जो चाँद की सतह से टकराकर हमारी आँखों तक आती है, बिल्कुल वैसे जैसे आईना रोशनी को उछाल देता है। सूरज हमेशा चाँद के आधे हिस्से को ही रोशन करता है। बाकी आधा हिस्सा हमेशा अँधेरे में रहता है। तो हम जो आकृति देखते हैं, वो इस बात पर निर्भर करती है कि चाँद का रोशन हिस्सा हमारी तरफ कितना मुड़ा हुआ है।

क मज़ेदार तरीके से सोचो। मान लो तुम एक अँधेरे कमरे में टॉर्च लेकर खड़े हो, और तुम्हारा दोस्त एक सफ़ेद गेंद लेकर तुम्हारे चारों तरफ चक्कर लगा रहा है। जैसे-जैसे वो घूमेगा, तुम्हें गेंद का कभी पूरा चमकता हिस्सा दिखेगा, कभी आधा, और कभी बिल्कुल नहीं। बस यही चाँद, पृथ्वी और सूरज के साथ होता है। तुम पृथ्वी पर खड़े हो, सूरज टॉर्च है, और चाँद वो गेंद है जो धीरे-धीरे तुम्हारे चारों तरफ घूम रही है।

चाँद पृथ्वी का एक पूरा चक्कर लगाने में लगभग साढ़े उनतीस दिन लेता है, यानी करीब एक महीना। जैसे-जैसे वो घूमता है, उसका रोशन हिस्सा हमें अलग-अलग मात्रा में दिखता है। इन्हें चाँद की "कलाएँ" कहते हैं। अमावस्या को चाँद बिल्कुल नहीं दिखता क्योंकि उसका रोशन हिस्सा हमसे दूर होता है। फिर धीरे-धीरे एक पतला हँसिया दिखने लगता है, फिर आधा, फिर पूरा। पूर्णिमा को पूरा चाँद दमकता है। फिर वापस वैसे ही घटता जाता है।

भारत में चाँद की इन कलाओं का बहुत महत्व है। दिवाली हमेशा अमावस्या को मनाई जाती है, जब आकाश सबसे अँधेरा होता है और दीयों की रोशनी सबसे ज़्यादा जगमगाती है। होली और कई त्योहार पूर्णिमा को मनाए जाते हैं। हमारे पूर्वज बिना कैलेंडर के, सिर्फ चाँद को देखकर जानते थे कि महीने में कौन सा दिन है।

जब 1969 में अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग चाँद पर उतरे और बोले "यह एक इंसान के लिए छोटा कदम है, लेकिन मानवजाति के लिए बहुत बड़ी छलांग," तब वो उसी चाँद पर खड़े थे जिसे हम हज़ारों सालों से देखते आ रहे हैं।

तो आज रात ऊपर देखो। चाँद किस आकृति में है? पतला हँसिया? आधा गोला? पूरा थाल? अब तुम जानते हो क्यों। चाँद बदल नहीं रहा, वो बस अपना रोशन चेहरा धीरे-धीरे तुम्हारी तरफ घुमा रहा है!

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