गुरुत्वाकर्षण क्या है?

गुरुत्वाकर्षण क्या है?

जितना ज़ोर हो सके उतना ऊपर कूदो। कूदे? अब देखो, तुम वापस नीचे आ गए। हमेशा नीचे ही आते हो ना? आसमान में नहीं उड़ जाते। छत से नहीं चिपक जाते। कोई अदृश्य ताकत तुम्हें हमेशा नीचे खींच लाती है। इसी ताकत का नाम है गुरुत्वाकर्षण, और यह ब्रह्मांड की सबसे ज़रूरी शक्तियों में से एक है।

सोचो, अगर गुरुत्वाकर्षण न होता तो क्या होता? माँ ने प्याली में चाय डाली, और चाय ऊपर हवा में तैरने लगी! दादी ने आम का अचार खोला, और अचार उड़ गया! दीवाली पर दीया जलाया, और वो ऊपर आकाश में चला गया! अजीब होता ना? असल में हम जो भी रोज़ाना करते हैं, उठना, बैठना, पानी पीना, गेंद फेंकना, सब कुछ गुरुत्वाकर्षण की वजह से ही संभव है।

गुरुत्वाकर्षण एक अदृश्य खिंचाव है जो पृथ्वी हर चीज़ पर लगाती है। जब तुम आम को पेड़ से तोड़कर छोड़ते हो, वो नीचे गिरता है। जब बारिश होती है, बूँदें नीचे आती हैं। जब क्रिकेट में छक्का मारते हो, गेंद ऊपर जाकर वापस नीचे आ जाती है। यह सब गुरुत्वाकर्षण करता है।

अब इसकी कहानी सुनो। करीब 350 साल पहले इंग्लैंड में एक वैज्ञानिक थे, आइज़क न्यूटन। एक दिन वो बगीचे में बैठे थे और उन्होंने देखा कि एक सेब पेड़ से नीचे गिरा। अब तुम सोचोगे, सेब तो रोज़ गिरते हैं, इसमें नया क्या है? लेकिन न्यूटन ने एक सवाल पूछा जो पहले किसी ने नहीं पूछा था: सेब नीचे ही क्यों गिरा? ऊपर क्यों नहीं गया? तिरछा क्यों नहीं गया? उन्होंने समझा कि पृथ्वी हर चीज़ को अपनी तरफ खींचती है, और उन्होंने इस खिंचाव को नाम दिया, गुरुत्वाकर्षण।

 

यहाँ एक मज़ेदार बात है जो बहुत लोग नहीं जानते: अंतरिक्ष में भी गुरुत्वाकर्षण होता है! अंतरिक्ष यात्री इसलिए नहीं तैरते कि वहाँ गुरुत्वाकर्षण नहीं है। वो इसलिए तैरते हैं क्योंकि उनका अंतरिक्ष यान इतनी तेज़ी से पृथ्वी के चारों तरफ घूम रहा होता है कि वो लगातार गिरते रहते हैं, बस नीचे नहीं आते! भारत के अंतरिक्ष यात्री भी जब अंतरिक्ष में गए, तो वो इसी वजह से तैरते नज़र आए।

और चाँद पर? वहाँ गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी से छह गुना कम है। मतलब अगर तुम्हारा वज़न यहाँ 30 किलो है, तो चाँद पर सिर्फ 5 किलो होगा! वहाँ तुम इतना ऊँचा कूद सकते थे जितना यहाँ सपने में भी नहीं कूद सकते!

जो ताकत तुम्हारे घर के आँगन में आम को ज़मीन पर गिराती है, वही ताकत चाँद को पृथ्वी के चारों तरफ थामे रखती है, पृथ्वी को सूरज के चारों तरफ, और पूरे सौरमंडल को एक साथ। एक अदृश्य धागा जो पूरे ब्रह्मांड को बाँधे हुए है। और यह सब एक गिरते हुए सेब को देखकर शुरू हुआ!

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